केन्द्रीय भूमि जल बोर्ड
भूजल संसाधन का आकलन
भूजल विकास एवं प्रबंधन की आयोजना में भूजल संसाधनों का प्रमाणन एक प्रमुख इनपुट होता है । इसके साथ-साथ ही यह नाबाड जैसे विभिन्न संस्थानों द्वारा भूजल विकास परियोजनाओं के वित्त पोषण हेतु भी एक बुनियादी इनपुट है । संसाधन आकलन एवं आकलन इकाईयों का वर्गीकरण विभिन्न भूजल योजनाओं एवं कार्यक्रमों के कार्यान्वयन हेतु आधार बनाते हैं ।
भूजल संसाधनों की गणना हेतु मानकीकृत पद्धति के लिए देश भर में विभिन्न भूजल वैज्ञानिक परिस्थितियों में विशिष्ट अध्ययन किए गए हैं । इस संदर्भ में केन्द्रीय भूमि जल बोर्ड ने यूएनडीपी, एसआईडीए, ब्रिटेन और कनाडा की सहायता से 3 घरेलू और 9 द्विपक्षीय परियोजनाओं के माध्यम से वर्ष 1974 से 1985 के मध्य जल संतुलन अध्ययन किए हैं । इन परियोजनाओं में देश भर में विभिन्न स्थानों पर मुलायम एवं कठोर शैल संरचनाओं को शमिल किया गया । नाबार्ड, शैक्षणिक संस्थानों, राज्य अभिकरणों द्वारा भूजल आकलन संबंधी विभिन्न अनुसंधान एवं विकास अध्ययन / सहयोगी अध्ययन भी निष्पादित किए गए । इन परियोजनाओं के निष्कर्ष से भूजल प्रणाली को बेहतर रूप से समाधान में सहायता प्राप्त हुई है तथा देश के वार्षिक पुनर्भरणीय राष्ट्रीय भूजल संसाधन के आकलन हेतु पद्धति की अवधारणा पूर्ण हुई ।राष्ट्रीय जल नीति-2002 में देश के सक्रिय भूजल संसाधनों के आवधिक आकलन की परिकल्पना की गई है । भारत सरकार द्वारा समय-समय पर गठित विभिन्न समितियों द्वारा भूजल संसाधन आकलन संबंधी पद्धति की समीक्षा एवं इसमें संशोधन किया गया ।
- भूजल अत्यधिक दोहन समिति 1979 के द्वारा पद्धति
- भूजल आकलन समिति 1984 द्वारा पद्धति
- भूजल संसाधन आकलन समिति 1997 द्वारा पद्धति ( जीईसी – 1997)
- कठोर शैल क्षेत्र में में भू जल संसाधन आकलन द्वारा पद्धति-2003
वर्तमान में भूजल संसाधनों का आकलन जीईसी 1997 द्वारा संस्तुत दिशानिर्देशों के अनुसार किया जाता है.। आकलन इकाइयों का वर्गीकरण कठोर समिति, 2003 द्वारा संस्तुत मापदंडों के अनुसार किया जाता है।
जीईसी - 1997 और कठोर शैल समिति, 2003 की सिफारिशों के अनुकरण में वर्ष 2004 में “भूजल आकलन संबंधी अनुसंधान एवं विकास सलाहकार समिति" नामक स्थायी समिति का गठन किया गया । समिति के विचारार्थ विषयों में मुख्य रूप से भूजल आकलन से संबंधित महत्वपूर्ण अनुसंधान क्षेत्रों की पहचान करना तथा अनुसंधान एवं विकास अध्ययन तथा सहयोगी परियोजनाओं के निष्कर्षों पर आधारित पद्धति का आवधिक मूल्यांकन एवं इसे अद्यतन करना है ।
देश के भूजल संसाधनों का आवधिक रूप से मूल्यांकन एवं इसे अद्यतन किया जा रहा है । संसादन दो प्रकार के होते हैं:
- प्रतिवर्ष पुनर्भरणीय सक्रिय भूजल संसाधन: इस संसाधन काक अद्यतन केंद्रीय भूमिजल बोर्ड और राज्य भूजल विभागों द्वारा संयुक्त रूप से किया जाता है ।
- स्थिर भूजल संसाधन: यह सक्रिय संसाधन के नीचे उपलब्ध होता है । इसका आकलन केंद्रीय भूमिजल बोर्ड के समन्वेषी वेधन के आधार पर किया गया है. अब तक स्थिर संसाधन का मुलायम शैल में 450 मीटर तक तथा कठोर शैल में 100मीटर तक आकलन किया गया है ।
सक्रिय भूजल संसाधन (मार्च, 2004 की स्थिति के अनुसार)
वार्षिक पुनर्भरणीय भूजल संसाधन 433 बीसीएम
निवल वार्षिक भूजल उपलब्धता 399 बीसीएम
सिंचाई हेतु वार्षिक भूजल ड्राफ्ट 231 बीसीएम
घरेलू और औद्योगिक उपयोग
भू जल विकास के चरण 58%
स्थिर स्वच्छ भू जल संसाधन 10,812 बीसीएमरिपोर्ट
भूजल संसाधन का आकलन
सक्रिय भूजल संसाधन (राज्यों एवं संघ राज्य क्षेत्र)
राज्यवर ब्लॉक का वर्गीकरण
भारत के सक्रिय भूजल संसाधन पर रिपोर्ट (मार्च, 2004 की स्थिति के अनुसार)
भूजल आकलन पर अनुसंधान एवं विकास सलाहकार समिति की रिपोर्ट
भू - जल संसाधन आकलन पद्धति की समीक्षा पर स्थिति रिपोर्ट
गहरी जलभृत के विकास की क्षमता के आकलन के लिए पद्धति पर कार्य दल की रिपोर्ट
भू - जल संसाधन आकलन के नए और वैकल्पिक तरीकों के सुझाव संबंधी समूह की रिपोर्ट
भारत के सक्रिय भूजल संसाधन ( 31 मार्च, 2009की स्थिति के अनुसार)उपर्युक्त रिपोर्ट और अन्य भू - जल संसाधनों के मूल्यांकन के बारे में पत्राचार पर टिप्पणियां / प्रतिक्रियाएं निम्नलिखित ई - मेल आईडी पर भेजी जा सकती है ।