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केन्‍द्रीय भूमि जल बोर्ड

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भू - जल प्रबंधन योजना


केन्द्रीय भूमिजल बोर्ड एक बहुसंकाय वैज्ञानिक संगठन है जिसका अधिदेश है भारत के भूजल संसाधनों की मानीटरिंग, अन्वेषण, आकलन एवं संवर्धन सहित इसके वैज्ञानिक एवं स्‍थाई विकास और प्रबंधन के लिए प्रौद्योगिकी का विकास और प्रचार-प्रसार करना । भूजल अध्‍ययन, अन्‍वेषण, निगरानी, मूल्‍यांकन आदि गतिविधियॉं जो सतत , प्रकृति के हैं को पहले "भू - जल सर्वेक्षण अन्वेषण, और अनुसंधान " स्‍कीम के तहत शामिल किया गया था ।  देश के विभिन्न भागों में भूजल की आकस्मिक स्थिति को ध्‍यान में रखते हुए इसके संवर्धन और विनियमित विकास सहित भू - जल संसाधनों के उचित प्रबंधन की आवश्‍यकता को  महसूस किया गया है, अत: पिछली स्‍कीम के दायरे को बढ़ाते हुए  इसमें भूजल संसाधनों के संवर्धन एवं  विनियमन संबंधित गतिविधियों को शामिल कर इसे भूजल प्रबंधन एवं विनियमन के रूप में पुन:नामित किया गया है ।  

योजना के उद्देश्य निम्‍नलिखित हैं:

  1. विभिन्न भूजलवैज्ञानिक परिस्थितियों में वैज्ञानिक नियोजन, विकास और भू - जल संसाधनों के प्रबंधन के लिए कार्यनीति  तैयार करना ।
  2. भूजल विकास,  संवर्धन और प्रबंधन के लिए क्षेत्र विशिष्ट तकनीकों / प्रौद्योगिकी का विकास एवं इसका कार्यान्‍वयन ।
  3. भू - जल संसाधनों के विकास और प्रबंधन को विनियमित एवं नियंत्रित करना ।
  4. भूजल के क्षेत्र में आने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए केन्‍द्रीय भूमि जल बोर्ड की प्रौद्योगिकी क्षमता एवं संरचनागत आधार के उन्‍नयन सहित अनुसंधान एवं विकास अध्‍ययन का संचालन करना ।
  5.  भूजलवैज्ञानिक अनुसंधान और भू - जल प्रबंधन में ज्ञान और शिक्षा के हस्तांतरण ।  इसके अलावा सूचना के प्रसार, शिक्षा, जागरूकता और प्रशिक्षण के माध्यम से भूजल विकास और प्रबंधन के सभी पहलुओं में क्षमता निर्माण में वृद्धि करना ।
  6. स्थायी भूजल विकास और प्रबंधन के लिए संबंधित केंद्रीय / राज्य सरकार संगठनों के साथ समन्वय बढ़ाना ।  

इस योजना का विस्‍तार क्षेत्र:

  1. क्षेत्र विशिष्‍ट भूमि जल विकास और प्रबंधन की योजना तैयार करने हेतु भूजल प्रबंधन अध्ययन ।
  2. भूजल प्रबंधन अध्ययन, भूजल अन्वेषण, कृत्रिम पुनर्भरण आदि के पूरक के रूप में दूर संवदी अध्‍ययन ।
  3. भूजल संभाव्‍य क्षेत्रों और गहरे जलभृतों का पता लगाने के लिए वेधन की सहायता से भूजल अन्वेषण करना ।
  4. कार्यप्रणाली को प्रभावी एवं अद्यतन बनाने सहित देश के जल संसाधनों का आवधिक मूल्यांकन।
  5. भूजल प्रेक्षण कुओं से भूजल स्तर और गुणवत्ता की निगरानी।
  6. क्षेत्र विशिष्ट प्रणाली के विकास एवं इसे अद्यतन करने तथा प्रमाणित प्रौद्योगिकी के आधार पर  पुनर्भरण स्‍कीमों के कार्यान्‍वयन के लिए कृत्रिम पुनर्भरण सहित वर्षा जल संचयन अध्‍ययनों का प्रदर्शन ।
  7. भूजल आंकड़ों के भंडारण, संसाधन एवं प्रचार-प्रसार के लिए डाटा भण्‍डारण एवं सूचना प्रणाली की स्‍थापना/ इसे अद्यतन करना ।
  8. राज्य सरकार संगठनों के साथ समन्वय से भूजल विकास और प्रबंधन पर नियंत्रण।
  9. सरकारी, अर्ध सरकारी और प्रयोक्‍ता अधिकरणों के लिए जल आपूर्ति अन्‍वेषण ।  
  10. सतही और उपसतही विधियों के माध्यम से अध्ययन संभावित जलभृतों का पता लगाने और भूजल अन्वेषण, कृत्रिम पुनर्भरण आदि के लिए उपयुक्त स्थलों के निर्धारण के लिए सतही एवं उपसतही विधियों से भूभौतिकीय अध्‍ययन ।  
  11. निर्णय निर्धारण के लिए बहुमापदण्‍ड तकनीक के उपयोग से क्षेत्र विशिष्‍ट भूजल प्रबंधन योजना उपलब्‍ध कराने हेतु भूजल मॉडलिंग अध्‍ययन ।
  12. कृषि ,औद्योगिक, और संबद्ध उद्देश्यों के लिए उपयोग सहित  विभिन्न प्रकार के उपयोग के लिए भूजल की उपयुक्‍तता निर्धारण करने के लिए भू - जल की गुणवत्ता का मूल्यांकन।
  13. रिपोर्ट, मानचित्र, भूजल एटलस और ब्रोशर तैयार करना और आयोजकों, प्रशासकों, और दावाधारकों के लिए सूचना का प्रसार-प्रचार करना ।
  14. भूजल के अध्ययन के लिए बेंचमार्क प्रणाली स्‍थापित करने के उद्देश्‍य से राज्य सरकारों के साथ समन्वय।
  15. भूजल की बचत और बंटवारे के पहलुओं पर वैज्ञानिक संस्थाओं के साथ संपर्क का विकास करना ।
  16. भूजल क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास अध्ययन आरंभ करना और भूजल अन्‍वेषण, विकास और प्रबंधन के लिए नई प्रौद्योगिकियों / तकनीक का प्रयोग एवं कार्यान्‍वयन भी करना ।
  17. उपयुक्त प्रयोगों के माध्यम से जल के कुशल प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन करना ।
  18. ड्रिलिंग रिग, जल वैज्ञानिक, भूभौतिकीय और रासायनिक विश्लेषण उपकरणों आदि अत्याधुनिक उपकरणों के अधिग्रहण के माध्यम से बुनियादी ढांचे का सुदृढ़ीकरण ।
  19. क्षमता निर्माण और ज्ञान हस्तांतरण आदि ।